सतगुरू तेरा दर्शन पाकर,
आँखों में सरूर आ जाता है ।।
जब चरणों में तेरी पहुँचती हूँ,
अपने पे गुरूर आ जाता है ।
जी भर के तुझको देखने की,
पूरी ही तमन्ना नहीं होती ।।
बेताब निगाहों के आगे,
परदा सा ज़रूर आ जाता है ।।
बिगड़ी तकदीर संवरती है,
तेरे इस दर पर आने से ।।
बेशक वो बड़ा खुश किस्मत है,
जो तेरे करीब आ जाता है ।।
दुःख दर्द के मारे जो सतगुरू,
तेरे दर पर आ जाते हैं ।।
रहमत का जज़्बा उमड़ता है,
दिल में भरपूर छा जाता है ।।
मिल जाये भक्ति मोहब्बत की,
जिसको भी तेरे दर से सतगुरू ।।
जीना तो उसी का जीना है,
जीने का सरूर आ जाता है ।।
तुम दोनों जहाँ की रोशनी हो,
दिल का ही उजाला हो सतगुरू ।।
इक झलक तेरी पड़ जाने से,
हर चीज़ पे नूर आ जाता है ।।
