अमर आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
शिवोहम..शिवोहम..शिवोहम.. ।।
अखिल विश्व का जो परमात्मा है ।
सभी प्राणियों में वही आत्मा है ।
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
जिसे शस्त्र काटे न अग्नि जलाये ।
गलाए न पानी न मृत्यु मिटाये ।
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
अजर और अमर जिसको वेदों ने गाया ।
यही ज्ञान अर्जुन को हरि ने सुनाया ।
(यही ज्ञान सतगुरु हमको सुनाया)
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
अमर आत्मा है मरणशील काया ।
सभी प्राणियों के जो भीतर समाया ।
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
है तारों सितारों में आभास जिसका ।
है चंदा और सूरज में प्रकाश जिसका ।
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
जो व्यापक है कण-कण में है वास जिसका ।
नहीं तीन कालों में है नाश जिसका ।
वही आत्मा सच्चिदानंद मैं हूँ ।।
