गुरु तेरे दरबार आते ही आते,
मेरे मन का सारा भ्रम मिट गया ।।
मुझे चाँद तारों की चाहत नहीं है,
मुझे मेरा अनमोल धन मिल गया ।।
गुरु तेरे दरबार में,
मेरा आत्म मंथन हुआ ।।
जगत में था ढूंढा जिसे,
हृदय में उसे पा लिया ।
ये तेरी ही वाणी का जादू असर है ।।
मुझे मेरा राधे रमण मिल गया ।।
अभिमान करते हैं जो,
कभी सर झुकाते नहीं ।।
प्रभु प्रेम धारा में वो,
कभी भी नहाते नही ।
मुझे आज परवाह नहीं जग की प्यारो ।।
मुझे मेरा गोपी कृष्ण मिल गया ।।
गुरु तेरी नूरी नज़र,
करे दिल पे गहरा असर ।।
जनम कितने वृथा गए,
मिला न हमें ऐसा दर ।
नहीं है नज़ारों की मुझको तमन्ना ।।
मेरा मन ये उत्सव भवन बन गया ।।
तुम्हीं मेरे वंदन गुरु,
तुम्हीं मेरी आराधना ।।
तू सत्यम शिवम सुंदरम,
तू ही है मेरी साधना ।
नज़र से नज़र को मिला दी कन्हैया ।।
मुझे मेरा सच्चा सजन मिल गया ।।
