तेरा ये दर न भूले,
तेरा ये दर न भूले ।
दे दे चाहे सारे खजाने,
पर तू न भूले ।
तेरा दर्शन सतगुरू,
सारे जग से मीठा लागे ।
हमने बांध लिए हैं,
इन चरणों में प्रीत के धागे ।
हम बच्चे हैं तू भगवन है,
साथ न छूटे ।।
जब अमृत वचनों का,
ये सावन बरसाता है तू ।
युग-युग के प्यासों की,
जैसे प्यास बुझाता है तू ।
मन की प्यासी नदियों का,
ये सागर न भूले ।।
हर कोई ना समझे,
प्रीत गुरू की होती क्या है ।
जिस पे मेहर तू कर दे,
बस उसने ही ये समझा है ।
हम पे लुटाई मेहर जो तूने,
पल भर ना भूले ।।
