सतगुरु (पूरे-गुरु) बिन जो हरि मिल जाए -२
हरि मिलने पर भी -२
मन का भेद भ्रम नही जाए ….
वो तो है मायापति नटवर -२
माया में हर्षाये -२
जीव जगत की रचना करके -२
सबको नाच नचाए -२
सुख के हेतू सब भटक रहे हैं -२
भव बंधन अड़ जाए -२
ज्ञान बिना आनंद कहाँ है -२
गुरु बिन ज्ञान न पाए -२
भाग्य बड़े जब हरि सतगुरु बन -२
जीवन में आ जाए -२
जीव ब्रह्म की एकता करके -२
सत्य स्वरुप लखाए -२
जीवन मुक्त तभी हो प्राणी -२
जब सतगुरु अपनाए -२
कहे प्रेमी गुरु कृपा प्रथम हो -२
फिर हरि ध्यान लगाए -२
