प्रभु को नही देखा हमने कभी,
पर इसकी जरूरत क्या होगी ।।
ऐ गुरु-ऐ गुरु तेरी सूरत से अलग,
भगवान की सूरत क्या होगी-क्या होगी ।।
क्यों धूप सताए दुखों की,
क्यो गम की घटा बरसे ।।
ये हाथ हैं कृपा वाले,
रहते हैं सदा सिर पे ।
तू है तो अन्धेरे पथ पे हमें ।। ओ…
सूरज की जरूरत क्या होगी ।
इंसान तो क्या देवता भी,
चरणों मे झुके तेरे ।
है स्वर्ग इसी सतसंग में,
कदमों के तले तेरे ।
हर कोई लुटाए तुझपे नयन ।। ओ…
ऐसी कोई मूरत क्या होगी ।
कहते हैं तेरी शान में तो,
कोई ऊँचे बोल नही ।
भगवान के पास भी गुरुवर,
तेरे प्यार का मोल नही ।
हम तो यही जाने तुझसे बड़ी ।। ओ…
संसार की दौलत क्या होगी ।
