वो जुबाँ कहाँ से लाऊँ
जिससे करूँ मैं शुक्रिया ।।
तूने किया है ऐसा जादू
मेरा होश भुला दिया है
पिला के अमृत रस का प्याला
इंसान बना दिया है ।।
कितने ना बुरे थे हम तो
तूने फिर भी उठा लिया है ।।
कितना कष्ट सह कर के भी
मुझे अपना बना लिया है ।।
मेरे जन्म-जन्म के साथी
मैंने अब तो तुम्हें पहचाना ।।
ख़ुद कृष्ण बनके तुमने
मुझे अर्जुन बना दिया है ।।
बेगम पुरी का बादशाह
तूने मुझको बना दिया है ।।
कर के आत्म ज्ञान की वर्षा
मुझे शेर बना दिया है ।।
मेरी नींद चुराने वाले
अब कैसे तुझे भुलाऊँ ।।
वो कलम नहीं है मिलती
जिससे शुक्राना लिख डालूँ ।।
मेरा जन्म-मरण मिटाने वाले
अब कैसे तुझे भुलाऊँ ।।
दिल दिया जो मैंने तुझको
अब कैसे किसे बिठाऊँ ।।
