गीता भगवन तेरे वचनों पे चलकर,
हम आज अपनी मंजिल पर आ गये है ।।
तेरे जैसा रहबर जो जीवन में आया,
जीवन मुक्ति आनन्द को पा गये है ।।
है लाखों से बढ़कर वचन ये तुम्हारे,
हीरे-मोतियों से लगे हमको प्यारे ।।
इस मन को तुम्हारे वचन भा गये है,
हम आज अपनी मंजिल पर आ गये है ।।
तुम्हारी नजर से मिली ऐसी शक्ति,
कि आठों पहर हो रही अब तो भक्ति ।।
बड़े भाग्य है जो ये दर पा गये है,
हम आज अपनी मंजिल पर आ गये है ।।
जगत की बातों ने बहुत था सताया,
मानो तपती लू ने बदन झुलसाया ।।
तेरी रहमतों के बादल छा गये है,
हम आज अपनी मंजिल पर आ गये है ।।
तेरा शुक्रिया किस जुबां से मैं गाऊं,
सिवा आंसुओं के क्या भेंट चढ़ाऊं ।।
शमा बनके रोशन जहाँ कर दिया है,
हम आज अपनी मंजिल पर आ गये है ।।
