गुरु के मुख से निकला,
हर वचन वरदान होता है ।।
जो सुन के चल पड़े,
वो ही असल विद्वान होता है ।।
गुरु के एक इशारे में,
भरी है रहमतें लाखों ।।
ये हाँ कह दे या ना,
दोनों में ही कल्याण होता है ।।
है वो हर बात दुखदायी,
जो हमने आप मनवाई ।।
है सुख जिस बात में शामिल,
गुरु का ध्यान होता है ।।
वो कविता, गीत, वो सत्संग,
हो जिसमें रंग गुरुमति का ।।
किसी को हो ना हो लेकिन,
किसे परवान होता है ।।
ना जाने बैठने वाला,
मगर मल्लाह सब जाने ।।
कहाँ पर है किनारा और,
कहाँ तूफान होता है ।।
प्रभु के प्रेमी ना भूले,
गुरु के भक्त ना भूले ।।
दिलों को जानने वाला,
वो जानिजान होता है ।।
