तेरे जैसा कौन है सतगुरु,
हर आँख में तेरा नूर है ।।
नज़रों से रह कर दूर भी,
किसी दिल से तू नहीं दूर है ।।
तेरे मुख पे है ये ही गर्जना,
मैं देह नहीं मैं हूँ आत्मा ।।
सब नाम रूप ये नाश है ।
बस एक है परमात्मा ।।
इस राज से मैं था बेखबर,
हर शह में तेरा वजूद है ।।
मेरा सच्चिदानंद रूप है,
दर्पण में तूने दिखा दिया ।।
तेरे दर पे मैं तो फ़कीर था ।
तूने क्या से क्या है बना दिया ।।
तेरे हाथ से जो पिया मैनें,
उस जाम का ये शरूर है ।।
तेरे नाम से ये बहार है,
आबाद है मेरी ज़िन्दगी ।।
हर श्वास में तेरी याद है ।
तेरी याद है मेरी बन्दगी ।।
तू शमा है तो मैं पतंगा हूँ,
ये ही प्यार का दस्तूर है ।।
किसी हाल का अब गम नहीं,
जीना है तूने सिखा दिया ।।
अब मंजिलों की भी चाह नहीं ।
लहरों में साहिल पा लिया ।।
चाहे फूल हों चाहे खार हों,
मुझे सब तेरा मंजूर है ।।
