तेरे प्रेम में तेरे प्यार में,
मेरा मन रहे तेरे साथ में ।
मेरे सतगुरू मेरे सतगुरू ।।
तेरा साथ है मेरी हर खुशी ।।
तेरा नाम है मेरी बन्दगी ।।
रहे मन में तेरी ही मूर्ति ।।
और मन रहे तेरे साथ में ।
हृदय में हो सद्भावना ।।
किसी भाव में अहंकार ना ।।
रहूँ छल कपट से दूर मैं ।।
शीतल बनूं तेरी छांव में ।
सारे विश्व में तेरी कीर्ति ।।
आनन्दमय तेरी मूर्ति ।।
इस जन्म में खुद को झुका दिया ।।
ना रहे जन्म की चाहना ।
हर आत्मा तेरा रूप है ।।
परमात्मा का ही रूप है ।।
मैने तेरा दर्शन कर लिया ।।
रहे और कोई भी आस ना ।
मेरा तन लगे निष्काम में ।।
तेरी राह में तेरे ज्ञान में ।।
मेरा नाम हो तेरे नाम से ।।
हर काम हो तेरे नाम से ।
