देखो संतो दिन सुहाना आ गया ।।
खुद खुदा रहमत बरसाने आ गया ।।
ढूंढते थे हम जिसे वीराने में ।।
घट मे ही हमको खुदा दिखला दिया ।।
जल रहे थे अहमता की आग में ।।
समता का अमृत पिलाने आ गया ।।
धर्म कहते है किसे मजहब है क्या ।।
राज रूहानी ये बताने आ गया ।।
इनकी वाणी में है संतो वो असर ।।
मुर्दा भी श्वासो की पूंजी पा गया ।।
