मन के गहरे अंधियारे में ।
आत्म ज्ञान दिए जैसा ।।
जिसने सच्चा गुरु है पाया,
उसने जीवन का सुख पाया ।।
श्वासों के बहते धारे में ।
ओम् नाम दिए जैसा ।।
क्या मेरा क्या मेरा अपना,
सारा जग है झूठा सपना ।।
जग माया के चौबारे में ।
प्रेम निष्काम दिए जैसा ।।
जिसका ना कोई इस दुनिया में,
सतगुरु उस की बाहें थामें।
बिन चन्दा के पखवारे में ।
गुरु का ज्ञान दिए जैसा ।।
