मेरे सतगुरू मुझे अपनी पसंदी का बना लो जी ।।
मुझे झुकना नही आता, मुझे झुकना सिखा दो जी ।
ये देह तेरी है सतगुरू जी, ये दिल तेरा दीवाना है ।।
तुझी में डूब ही जाऊँ ।।
अपने में मुझे समा लो जी ।
जो हूँ तुमने बनाया है, न पिछला कुछ भी बाकी है ।।
तुम ने इतना बनाया है ।।
अभी पूर्ण बना दो जी ।
तुमने सब चाह पूर्ण की, सिर्फ इक चाह बाकी है ।।
कि बस अब काम हो पूरा ।।
आत्मा में मुझे टिका दो जी ।
तेरा अहसान हैं कितना, हुआ कुर्बान तू कितना ।।
शुक्रिया कैसे हो सकता ।।
ज़रा ये भी बता दो जी ।
