श्वासों के तार तार में,
प्रभु (गुरु) प्रेम को पिरो लो ।।
निष्काम कर्म का ।।
जीवन में बीज बो लो ।
जीवन का एक-एक पल,
अनमोल है खज़ाना ।।
इनमें से एक पल भी,
नही लौट के है आना ।।
आनन्द रस से अपना ।।
अन्तःकरण भिगो लो ।
ज्ञानी की ये निशानी,
मीठी सी उनकी वाणी ।।
मीठे से बोल में है,
प्रभु की झलक सुहानी ।।
बोलो तो मीठे बोल ही ।।
अमृत हृदय में घोलो ।
बीती का गम तू ना कर,
लो मिट गया अन्धेरा ।।
खुलती जहाँ ये आँखें,
होता वहाँ सवेरा ।।
तेरे द्वार प्रभु पधारे ।।
अंतर के नैन खोलो ।
