सतगुरु की शरण आना, जीवन को सफल करना
चाहो जो चौरासी से बचना तो सत्संग से प्रीति करना
जाने कितने युगों से बिछड़े थे हम,
कैसे मिलन हुआ नहीं जाने हम -२
इस प्रेम की डोरी में अब तो
प्यारो सब बंधे रहना
सतगुरु की शरण आना…
नित अमृत यहां बरसता है
जिसे पी के अमर हम बनते हैं -२
इन प्रेम प्यालों को सब प्यारों
नित-नित पीया करना
सतगुरु की शरण आना…
गुरु ज्ञान का दीप जला कर के
नित प्रेम का तेल देते रहना -२
शमा के दीवानों-परवानों
श्रद्धा-विश्वास बनाए रखना
सतगुरु की शरण आना…
