हुकुमे अन्दर सब कोई, बाहर हुकुम न कोई -२
नानक हुकुमे जे बुझे होमै कहे न कोई।
(नानका होमै कहे न कोई)
हुकुम से रोता है कोई, हुकुम से गाए गीत-२
हुकुम से रूठा है कोई, हुकुम से होये प्रीत ।
(नानका हुकुम से होय प्रीत)
हुकुम से बिगड़ा है कोई, हुकुम से हुआ है मीत।
हुकुम से होवे हार, हुकुम से होवे जीत।
(नानका हुकुम से होवे जीत)
हुकुम से सोया है कोई, हुकुम से जागा कोई।।
हुकुम से मुरझाया कोई, हुकुम से खिलता कोई।
(नानका हुकुम से खिलता कोई)
हुकुम से होता है सभी, हुकुम बिना न होय।।
हुकुम पहचाना है तभी, सुख दुःख भास न होय।
(नानका सुख दुःख भास न होय)
हुकुम से सतगुरू मिलया, हुकुम से सतगुरू ज्ञान ।।
हुकुम से सतगुरू बोलया, हुकुम ही हुकुम पहचान।
(नानका हुकुम ही हुकुम पहचान)
