मुझको अपने सतगुरु की रहमतों पे नाज़ है ।।
उनके मीठे बोल से दुनिया मेरी आबाद है ।।
दूर हूँ या पास हूँ,
मुझ पर ही है तेरी नज़र ।।
मैं अगर भूलूँ तो भूलूँ,
तू ना पर भूले मुझे ।।
तू ही मेरा मीत है,
अब तू ही मेरा साज़ है ।।
मेरा जन्म मरण दुख दूर हुआ,
तेरे वचनों से जब प्यार हुआ ।।
मझधार में किश्ती डूबी थी,
भवसागर से तूने पार किया ।।
कल की कुछ परवाह नहीं,
जो कुछ भी है बस आज है ।।
कोई तो कुछ भी कहे,
खामोश है मेरी जुबां ।।
औरों की मुझे चाह नहीं बस,
बस तू हो मुझपे मेहरबां ।।
जल के भी रोशन ही होना,
शमा का अन्दाज़ है ।।
मुख पे हो ये वचन तेरे,
और दिल में तेरी ही याद हो ।।
दर पे आकर भी तेरे,
तुझसे क्यों कोई दूर हो ।।
ये जमीं क्या अर्श से भी,
गूंजती आवाज़ है ।।
